Wednesday, 4 November 2015

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Wednesday, 28 October 2015

सुप्रीम कोर्ट ने कहा


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देशहित में उच्च शिक्षा संस्थानों से सभी तरह के आरक्षण को हटा दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इसके लिए निष्पक्ष होकर फैसला लेने को कहा है।'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर दुख जताया कि आजादी के 68 सालों बाद भी कुछ विशेषाधिकार नहीं बदले हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा और पीसी पंत की बेंच ने मंगलवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को सुपर-स्पेशिऐलिटी कोर्स में मेरिट को प्रमुख आधार मानकर दाखिला देने के कई रिमांइडर देने के बावजूद ऐसा नहीं हो सका है। बेंच का कहना था कि ऐसे कोर्सों में भी अक्सर योग्यता पर आरक्षण भारी पड़ जाता है।
बेंच ने टिप्पणी की, 'उम्मीद अब भी उम्मीद ही है...अगर बाकियों से प्रतिस्पर्धा हो तो विशेषाधिकार प्राप्त लोगों की स्थिति अब भी वही है।' बेंच ने यह भी कहा कि वह 1988 में सुप्रीम कोर्ट के दिए दो फैसलों से पूरी तरह से सहमत है।
इन दो फैसलों में मेडिकल संस्थानों में सुपर-स्पेशिऐलिटी कोर्स में दाखिले में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'कोई आरक्षण नहीं होना चाहिए' क्योंकि उच्च शिक्षा का स्तर सुधारना देश हित में होगा। इसी के साथ देश के लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी सुधरेगी। इन फैसलों में कहा गया था, 'हमें उम्मीद और भरोसा है कि भारत सरकार और राज्य सरकारें बिना देरी किए इस पर गंभीरता से विचार करेंगी और जरूरी निर्देश जारी किए जाने चाहिए।'
सुप्रीम कोर्ट की 27 साल पुरानी टिप्पणी का हवाला देते हुए मंगलवार को बेंच ने कहा कि वह उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण पर केंद्र और राज्यों को यही संदेश देना चाहती है। बेंच ने आगे कहा, 'हम अन्य लोगों की भावनाओं और इच्छाओं को दोहरा रहा हैं ताकि अधिकारी स्थिति का निष्पक्ष होकर अनुमान लगाएं, स्थिति से सही तरह से पेश आएं और देशहित को प्रमुखता दें।' बेंच ने कई आदेशों का हवाला देकर कहा कि सरकारी अधिकारियों को कहा कि छात्रों को विभिन्न तरह की छूट देने से बेस्ट कैंडिडेट की बेस्ट ट्रेनिंग पर भी असर पड़ेगा।

Wednesday, 9 September 2015

सुप्रीम कोर्ट की फटकार राष्टीय पिछड़ा आयोग को

सुप्रीम कोर्ट की फटकार राष्टीय पिछड़ा आयोग को
देश का सुप्रीम कोर्ट भी मानने लगा की अब बहुत होगया आरक्षण का खेल उसने  राष्टीय पिछड़ा आयोग को बुरी तरह फटकार भी लगी अब नेता क्यों अपनी राजनीती करने में लगे यह तो आप समझ ही गए होगे भाइयो अब जाग जाओ और आरक्षण के खिलाफ लड़ो नही तो ऐसे ही आरक्षण की मर झेलते रहोगे और नेता अपनी नेता गिरी करते रहेंगे अपनी नही तो अपने आने बाली पीढ़ी की सोचो क्या होगा जब कही यह प्राइवेट में भी लागू कर दिया गया तो क्यों कि जब लागू होगा तो यही नेता सपोर्ट के लिए खड़े होंगे और जब आज खत्म करने की बात करो तो हिंदुत्व का पाठ पड़ते है ऐसे लोगो से दूर रहो और सबसे पहले आरक्षण ख़त्म करो फिर हिंदुत्व के लिए लड़ो आज नही तो कभी नही आओ मिलकर करे एक आरक्षण मुक्त भारत का निर्माण
आरक्षण मुक्त भारत अभियान
अरुण चौहान मथुरा

Tuesday, 8 September 2015

आरक्षण देश लिए अभिषाप है

आरक्षण देश लिए अभिषाप है
आज कल देश के हर कोने से आरक्षण विरोधी आंदोलन और रैली निकलने लगी है क्यों कि अब और नही आरक्षण को भारत में रहने दिया जाएगा एक उभाते हुए भारत को कोई रोक रहा है तो वह है आरक्षण क्यों कि आरक्षण देश को खोखला कर रहा है जो लोग जिस पद के लायक  उनको आरक्षण दे कर अगर वह पद दे दिया जाएगा तो क्या होगा जिसके वह काविल ही नही था बातो क्या कोई आरक्षण से देश तरकी कर सकता है नेता कहते है हम सबको साथ ले कर चलेंगे तो फिर यह क्या है की तुम्हारा बेटा ८०-८५ % लेकर भी बहार है वही ५०-६० % बाला आरक्षण कोटे से आ जाता है क्या यह समानता है नही तुम्हारे और तुम्हारे बच्चो साथ न इंसाफी है फिर भी हम सब चुप बैठे देख रहे है भाइयो  कोई और नही हम सबको मिलकर इससे लड़ना होगा कोई नेता न कोई सरकार तुम्हारे साथ खड़ी होगी न इसको ख़त्म करने की सोचेगी तो क्या हम लोग मिलकर इसके फिलफ नही लड़ सकते हर जाति का नेता उसके पीछे उनका वोट बैंक क्या हम लोग नही कर सकते तो क्यों इंतज़ार कर रहे हो किसी का कोई नही आएगा यह लड़ाई हम सभी की हम सभी मिलकर लड़ेंगे और अपना हक़ किसी और को नही लेने देंगे नही मिला तो छीन लेंगे

आरक्षण अप्राकृतिक , भ्रष्ट लोकतान्त्रिक व्यवस्था है
धार्मिक , सामाजिक एवम सरकारी सभी जगह से आरक्षण को हटाने की पहल होनी चाहिये ।
सच कहा जाय तो आरक्षण केवल भ्रष्‍ट नेताओं के लिये एक हथियार बन गया है और
लोगों की योग्‍यता की जगह बेकार लोग नौकरी पाते जा रहे हैं,
इससे अच्‍छा है कि जिन्‍हें नौकरी की जरूरत है
उन्‍हें सारे साधन मुहैया कराके उन्‍हें योग्‍य बनाया जाय

कुछ शब्द आप के भी इस के बारे में .
आरक्षण मुक्त भारत अभियान
अरुण चौहान मथुरा