यह देखो आरक्षण का खेल क्या समनता है देश की जनरल कास्ट के साथ अब भी कुछ यही बोलंगे की यह तो मेरा कह है तो मैं उनसे पूछना चाहिता हूँ क्या यह हक़ उनके बाबा दे गए थे आज देश का पड़ा लिखा युवा घूम रहा है कुछ बिना पड़े ही सरकारी कालेज और सरकरी नौकरियां कर रहे है क्यों कि उनके पास एक जाति का लिखा हुआ प्रमाण है वह भी सरकार की मुहर लगा हुआ वही अगर किसी सवर्ण ने जाति का नाम ले कर बुला दिया तो उस पर केस होगा क्यों कि देश के सभिधन और नियमो में लिखा है शर्म आती है ऐसे नियम बनने बालो पर लगता है जैसे इनको भी सिर्फ आरक्षण कोटे बालो ने ही बना लिया पर फिर एक सवाल मनमे उठता है फिर हमारे नेता क्या कर रहे थे या वह भी अपने स्वार्थ के लिए इनसे मिलगये थे जैसे आज मिले हुए है जो आरक्षण पर कुछ भी बोलने से दूर दूर तक कोई वास्ता नही रखते फिर एक सवाल मन को कचोटता है जब चूनाव आते है फिर यह नेता कैसे जाति की दोहाई देते है इसलिए बोलता हूँ मित्रो इनका कोई धर्म नही कोई समाज नही अब अपने आप आओ और अपने बच्चो के भविष्य के लिए लड़ो तो ही आरक्षण से मुक्ति मिलेगी अब फैसला तुम्हरे हाथ में है मैं यह फोट के माध्यम से कुछ दर्शा रहा हूँ गौर करो ऐसा सभी सरकारी कामो में होता है जिससे तुम्हरे होनहार बच्चे आज दर दर भटक रहे है और गधे मौज ले रहे है तुमको लगता है मेरे बच्चे ने कुछ काम पढ़ाई की होगी ऐसा नही वह विचारा कितना भी पड़ ले कर यह आरक्षण उसको सभी जहा रोकेगा एक के बाद एक आरक्षण की बाधा जो डाल राखी है नेताओ ने सिर्फ अपने भले लिए क्या देश आरक्षण से तर्के करेगा
आपका
अरुण चौनन
आरक्षण मुक्त भारत अभियान
आपका
अरुण चौनन
आरक्षण मुक्त भारत अभियान


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